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Loneliness story in hindi (akelapan)

​एक कहावत है “अंत भला तो सब भला” यानि रास्ते में जितनी मर्जी समस्याए आये अगर उसका अंत अच्छा है तो सब कुछ अच्छा है इसका मतलब Happy Ending . लेकिन इस Happy Ending की सही परिभाषा क्या है ये साफ नही है हालांकि Happy Ending का मतलब सबके लिए अलग अलग हो सकता है. इसे आज हम एक कहानी की मदद से समझने की कोशिश करते है जो संजय सिन्हा की book रिश्ते की एक श्रन्ख्ला से ली गई है….
 
HAPPY ENDING – THE STORY ON LONELINESS IN LIFE IN HINDI
 
दिल्ली में एक engineer  रहा करता था और हम आपको बता दे कि वो अब नही रहा. यानी वह अब जीवित नहीं है. इंजिनियर साहब ने अपने काम और समाज में काफी इजात कमाई. और इसी के चलते उनकी शादी भी एक अच्छी लड़की से हो गई. और दो बच्चे भी हो गए.
सब कुछ सही चल रहा था काफी सारी कठिनाईयों से गुजरते हुए उन्होंने अच्छे खासे पैसे कमा लिए. आने जाने वाले उन्हें सलाम ठोकने लगे, बच्चे बड़े हो गए और विदेश में जा कर रहने लगे फिर एक दिन उन्हें पाता चला की वो 60 साल के हो गए. और रिटायर्मेंट का समय आ गया. वो अपनी पिछली जिंदगी को याद करने लगे की कैसे उन्होंने अपने दिन बिताये है लेकिन अब उनके पास सिर्फ उनकी श्री मति थी. नौकरी और कामयाबी के पीछे भागते हुए उनके कुछ रिश्ते विदेश चले गए थे और कुछ छूट गए थे. रिटायर्मेंट के बाद वो खुद को अकेला और तनहा महसूस कर रहे थे. और उन्होंने देश के प्रधानमंत्री की तारीफ में एक पत्र लिखा और उसमे  लिखा की मैं आत्महत्या करने जा रहा हूँ और ये मेरी जिन्दगी का सर्जिकल स्ट्राइक है. उन्होंने अपने पत्र में आत्महत्या का कारण तनाव और तन्हाई बताई और अंत में लिखा “ये है Happy Ending (हैप्पी एंडिंग)”
क्या ये Happy Ending है ? नही इंजिनियर साहब बीमार नही थे उन्हें पैसे की भी कोई तंगी नही थी लेकिन वो तनहा थे जब तक वो नौकरी कर रहे थे तब उन्होंने अपने बारे में नही सोचा अपने रिश्तो के बारे में नही सोचा. हलाकि तब उनकी समाज में एक जगह थी लोग उन्हें सलामी ठोकते थे. लेकिन रिटायर्मेंट के बाद वो सब भी छुट गया और वो खुद को अकेला महसूस करने लगे. और अपनी आत्महत्या को हैप्पी एंडिंग का नाम दे दिया.
आज हमे ये कहानी पढ़ कर सोचना चाहिए की कही ऐसी कोई तन्हाई हमारे अन्दर तो जन्म नही ले रही और अगर ले रही है तो हमे उस पर सोचना चाहिए और रिश्तो की और वापिस जाना चाहिए. आज के बदलते समय में में सुसाइड के मामलो में तेजी से बढोतरी देखने को मिल रही है. पहले खुदखुशी के मामले जहाँ युवा वर्ग तक सिमित थे वही आज बढती उम्र के लोगो में भी यह कदम देखे जा सकते है जिसका एक बड़ा कारण अकेलापन है. इससे बचने का सबसे कारगर उपाय है खुद को लोगो से कनेक्ट करना . लोगो से बाते कीजिये और खुद को समाज का एक महत्वपूण हिस्सा मानिए. एक आदमी हैप्पी एंडिंग लिख कर भले ही मर जाए पर उसका ये मतलब नही की वो एक Happy Ending है.
 
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