self improvement (self knowlege)

How to think positive for become successful in life- in hindi(sakaratmak kaise soche)

​सकारात्म्क विचार(positive thoughts) और नकारात्मक विचार(negative thoughts), आशावाद(optimism) और निराशावाद(pessimism) जीवन की ऐसी चीजे है जो जीवन के हर मोड़ पर आपको बहुत प्रभावित करती है। आज के competition भरे युग मे आज इनका महत्व बहुत बढ़ गया है। जीवन के प्रति आपका दृष्टिकोण क्या है इसे जाने बिना आप आगे नहीं बढ़ सकते. खास कर आज के इस पूंजीवादी युग मे जब हर कोई एक दूसरे से आगे निकलना चाहता है, बढ़ा इंसान बनना चाहता है, कामयाबी पाना चाहता है, अमीर बनना चाहता है। ये ऐसी चीजे है जिसे सोच कर आज का युवा प्रेरणा लेता है। यही ऐसी चीजे है जो उसको मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है और अपने लक्ष्य को पाने के लिए वह पूरे जोश के साथ कार्य करता है। आज का युग प्रतिस्पर्धा का युग है जो आप सोच रहे है ऐसा हो सकता है आपके जैसे कई ओर लोग भी हो जो वही पाना चाहते हो जो आप पाना चाहते है। यह जरूरी नहीं की आप जो सोचे वो आपको मिल ही जाएगा ऐसी स्थिति मे आपका दृष्टिकोण ही आपके लिए संजीवनी बूटी का काम कर सकता है। सफल ना होना कोई घोर अपराध नहीं है जैसा की विश्व प्रसिद्ध एडीसन ने कहा की मै दस हजार बार असफ़ल नहीं हुआ बल्कि मैंने दस हजार ऐसे गलत तरीके खोज निकाले जो काम नहीं करते । यही था उनका जीवन और असफलता के प्रति दृष्टिकोण जो सकारात्म्कता और आशावाद की ओर झुका हुआ था। हम जो चाहे अगर वह हमे ना मिले तो हमारे अंदर frustration आ जाती है। यही वह समय होता है जब हमारा दृष्टिकोण काम मे आता है। यही वह समय होता है जब कुछ लोग मायूस हो जाते है और हार मान लेते है तो कुछ लोग अपने से आशा बनाए रखते है। निराशा की स्थिति मे भी आशा की किरण नहीं छोड़ते। याद रखना किसी भी लक्ष्य मे हार तब तक नहीं होती जब तक हम उस लक्ष्य को छोड़े नहीं और अगर हमने लक्ष्य छोड़ दिया तो समझो हम हार गए। यही तो है सकारात्म्क्ता और आशावाद। जिनहोने इतिहास रचे है उन्होने हमे यही तो सिखाया है।

आप आशवादी है या निराशावादी। जीवन के प्रति आपका दृष्टिकोण क्या है। क्या आप सकारात्म्क है या नकारात्मक क्या कभी आपने यह जानने की कोशिश की है। यह जानना आपके लिए बहुत जरूरी है क्योकि ये आपके लक्ष्यो, आपकी कामयाबीयो, आपके विकास से जुड़ी हुई है और उसे प्रभावित करती है। अगर आप नकारात्मक विचार वाले है तो सकारात्म्क विचार वालों की तुलना मे आप इस दुनिया को अलग ढंग से देखेंगे। निराशा की स्थिति मे आशा बनाए रखना, दुर्भाग्य से लड़ना और संयम बनाए रखना यही तो गुण है आशवाद के। आशावादी अपने ऊपर विश्वास बनाए रखता है, भाग्य और कामयाबी के बीच का फर्क समझता है। उसके विचार सकारात्म्क होते है। ऐसी स्थितियो मे भी जब चीजे उसके पक्ष मे नहीं जा रही हो वह हार नहीं मानता और अपने लक्ष्यो और सपनों को दोबारा बुनता है। उसे पता है की सफलता कड़ी मेहनत और समझदारी से जरूर मिलेगी। जबकि निराशावादी बहुत जल्दी हार मान लेता है, वह नकारात्मक विचारो वाला होता है और मुश्किलों के वक़्त वह अपने आप को हतोत्साहित करता है।
अच्छी बात यह है की अगर हमे अपने नजरिए के बारे मे पता हो की हम सकारात्म्क है या नकारात्मक तो यह हमारे लिए अच्छा साबित हो सकता है। “मै जो भी करता हु वह मेरे लिए अच्छा साबित नहीं होता” इस तरह के विचारो से आपका अपने ऊपर कम आत्मविश्वास झलकता है। अपने दृष्टिकोण मे परिवर्तन लाकर हम अपने जीवन मे एक बढ़ा परिवर्तन ला सकते है और समस्याओ का बेहतर तरीके से सामना कर सकते है। इसी संदर्भ मे इस बात का जिक्र करना आवश्यक है की मनोवैज्ञानिक cognitive behavior therapy के जरिये के जरिये व्यक्ति के नकारात्मक, अतर्कसंगत और विवेकहीन विचारो मे परिवर्तन लाते है। cognitive psychology मनोविज्ञान की वह शाखा है जिसमे व्यक्ति के thoughts और perceptions का अध्यन किया जाता है। व्यक्ति के नकारात्मक विचारो और व्यवहारों को बदलने मे cognitive behavior therapy (cbt) काफी मदद पहुचाती है। इस therapy मे नकारात्मक विचारो से निपटने के लिए व्यवहारिक तरीको का प्रयोग किया जाता है। इसके बारे मे हम अपने अगले पोस्ट मे ज्यादा विस्तृत वर्णन करेंगे।
The secret नामक किताब मे rhonda byrne dr. ben Johnson के विचारो का उल्लेख करती है जिसमे Johnson का मानना है की सभी तनाव एक नकारात्मक विचार से शुरू होते है. Johnson नकारात्मक विचारो को तनाव का प्रमुख कारण कारण मानते है। उनका ये भी मानना है की एक छोटा सकारात्म्क विचार इन नकारात्मक विचारो को बदलने मे सहायक हो सकता है। इसी किताब मे Michael beckwith के इस विचार का भी जिक्र किया गया है जिसमे वे कहते है की ये वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है की एक सकारात्म्क विचार नकारात्मक विचारो की तुलना मे सौ गुना ज्यादा ताकतवर होता है। उदाहरण के लिए तनाव(stress) से निपटना  एक आशावादीव्यक्ति के लिए ज्यादा आसान है एक निराशावादी व्यक्ति की तुलना मे। इसका मतलब यह नहीं की आशावादी व्यक्ति के पास तनाव से छुटकारा पाने के लिए कोई जादुई छड़ी है, बल्कि वह  तनाव को निरशवादियों या साधारण व्यक्तियों की तुलना मे ज्यादा बेहतर तरीके से या ये कहे की सकारात्म्क तरीके से निपटता है। और दूसरों की तुलना मे तनाव से तेजी से छुटकारा पा सकता है। एक आशावादी बाकियों की तुलना मे कम चिंतित या परेशान रहता है, यह उसके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत उपयोगी रहता है। आशावादी impossible मे भी possible ढूँढता है। प्रसिद्ध Winston Churchill ने कहा था की एक निराशावादी हर अवसर मे कठिनाई देखता है जबकि आशावादी हर कठिनाई मे अवसर देखता है। दोस्तो, आशावाद(optimism) बदलते युग की मांग है, आज जब प्रतियोगिता चरम पर है बिना आशावाद और सकारात्म्क विचार के आगे बढ़ना कठिन है। जरूरी नहीं की ये गुण सबके पास हो पर ऐसा भी नहीं है की इस गुण को सीखा ना जा सके।
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