Real stories of great people

मुहम्मद अली,- The real fighter

​January 17, 1942 को जन्मे मुहम्मद अली, अमेरिका के एक बॉक्सर हैं| आज विश्वभर में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो मुहम्मद अली को नहीं जानता होगा| मात्र 18 साल की आयु में अली light heavyweight चैंपियनशिप में गोल्ड मैडल प्राप्त कर चुके थे| अली बीसवीं सदी के सबसे प्रभावशाली खिलाडी रहे हैं| उनको “The Greatest” के नाम से भी जाना जाता था| मुहम्मद अली एक बॉक्सिंग चैम्पियन होने के साथ साथ एक आदर्श पुरुष भी रहे हैं| उनके जीवन की कई खूबियाँ हैं जो बेहद प्रेरणादायी हैं| उनके इस प्रेरक जीवन से कुछ घटनायें आज हम आपके साथ शेयर कर रहे हैं और हमें पूरी उम्मीद है कि इनको पढ़कर आपका मनोबल बढेगा –
Will Power is more important than Skill
दृढ निश्चय, आपके स्किल से ज्यादा महत्वपूर्ण है
एक मैच के दौरान मुहम्मद अली हार के कगार पर खड़े थे| उस बोक्सिंग मैच में उनका प्रतिद्विंदी उसने ज्यादा शक्तिशाली था| उसके पंचों ने अली को बुरी तरह घायल कर दिया| मुहम्मद अली जमीन पर गिर पड़े|
उनकी हार निश्चित थी, अली की ताकत ने जवाब दे दिया था और उनकी स्थिति दोबारा से उठने लायक नहीं लग रही थी| इस कठिन समय में उनके स्किल और उनकी ताकत ने भी उनका कोई साथ नहीं दिया लेकिन एक चीज़ थी जो उनको सहारा दे रही थी, वो थी उनकी – दृढ इच्छा|
उनकी दृढ इच्छा बार बार अन्दर से पुकार रही थी कि उठ जा, उठ खड़ा हो क्यूंकि तू हारने वालों में से नहीं है| ये मैच तेरा है तुझे इस प्रतिद्वंदी को किसी भी कीमत पर हराना है क्यूंकि तू विजेता है, उठ, उठ खड़ा हो……
आपको यकीन नहीं होगा, मुहम्मद अली पूरे जोश के साथ उठ खड़े हुए और अपने प्रतिद्वंदी को चारों खाने चित्त कर दिया|
मैच के बाद जब लोगों ने पूछा कि आप उठने जैसी हालत में नहीं लग रहे थे फिर आप अचानक कैसे उठ गए? तब मुहम्मद अली ने बताया था कि ये करिश्मा है उनके दृढ निश्चय है, ताकत और स्किल अपनी जगह है, जब मैं गिर पड़ा तो ना मेरी ताकत मेरे काम आई और ना मेरा स्किल. केवल मेरी दृढ शक्ति ही मेरे साथ थी| दृढ इच्छा इंसान को कभी मरने नहीं देती, ये एक ऐसी शक्ति है जो पहाड़ों का सीना चीर कर राह बना सकती है|
Champions aren’t made in gyms. Champions are made from something they have deep inside them – a desire, a dream, a vision. They have to have the skill and the will. But the will must be stronger than the skill- Muhammad Ali
Win Yourself
खुद पर जीत है ज्यादा जरुरी
मुहम्मद अली जब रिंग में जाते थे तो वो रिंग के अंदर जीतने से पहले, रिंग के बाहर खुद को जीतते थे| मुहम्मद अली जब रिंग में जाते तो केवल एक ही बात बोलते थे – “I am the Winner”

I am the Winner.. I am the greatest

I am the Winner… I am the greatest

I am the Winner.. I am the greatest
यहाँ तक कि वो रिंग में जाकर अपने प्रतिद्वंदी को भी बोल दिया करते थे कि ये मैच भले भी तुम जीत जाओ लेकिन महान मैं हूँ… I am the Greatest.
उनका कहना था कि जीतने से पहले खुद को विश्वास दिलाना बहुत जरुरी है कि मैं विजेता हूँ| मेरी लड़ाई का परिणाम जो भी हो लेकिन मैं विजेता हूँ और विजेता रहूँगा|
जो इंसान रिंग में जाने से पहले ही मैच को जीत चुका हो तो सोचिये रिंग में जाने के बाद उसका आत्मविश्वास कैसा होगा| यही उनकी सफलता का सबसे बड़ा राज था कि हर जीत से पहले खुद को जीत लेना और कहना – I am the Winner
Don’t be satisfied with second best. Go First Class
मुहम्मद अली कहते हैं कि पोजीशन 2nd, 3rd, 4th हो सकतीं हैं लेकिन विजेता केवल एक ही होता है – नंबर 1… केवल दूसरे और तीसरे नंबर पर आकर संतुष्ट मत होइये क्यूंकि आप बेशक दूसरे या तीसरे नम्बर पर हों लेकिन आप विजेता नहीं हैं| आपको विजेता होना है, मैं हमेशा विजयी बनने की कोशिश करता हूँ|

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