hindi shayri with pic

​हमारे दरमियान…

पता नहीं हमारे दरमियान यह कौन सा रिश्ता है, 

लगता है कि सालों पुराना अधूरा कोई किस्सा है। 

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तुम्हारे साथ आजकल यूँ हर जगह रहता हूँ मैं, 

हद से ज्यादा सोचूं तुम्हें बस यहीं सोचता हूँ मैं। 

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तुम्हारी तस्वीरों में मुझे अपना साया दिखता है, 

महसूस करता है जो यह मन वहीं तो लिखता है। 

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तुम्हारी आवाज़ सुनने को हर पल बेक़रार रहता हूँ, 

नहीं करूँगा याद तुम्हें मैं खुद से हर बार कहता हूँ। 

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नाराज़ ना होना कभी बस यहीं एक गुज़ारिश है, 

महकी हुई इन साँसों की साँसों से सिफ़ारिश है। 

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बदल जाए चाहे सारा जग पर ना बदलना तुम कभी, 

ख़्वाबों के खुशनुमा शहर में मिलने आना तुम कभी।

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